सुलगती आहें उभर आई है बिंदी बनकर
न जाने ये मौन क्या गुल खिलायेगा अब ?
तुमने आज सहकर देख लिया, अब मेरी बारी है ?
तेरी आँखों को मैंने पढ़ लिया, अब तेरी बारी है ?
भीगी बारिस में एक परी, किसका रस्ता यूँ ताक रही ?
कहती बूंदें ये बरस बरस, तू व्यर्थ ही रस्ता ताक रही ?
अनुरागी बैरागी मांगे, प्रभु पद में अनुराग
बैरागी अनुरागी बन, जग से कैसे वितराग
बैरागी अनुरागी फिर, कैसे जग से अनुराग ?
वितरागी अनुरागी फिर, कैसे जग से बैराग ?
15.08.2012
